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शनि साढ़ेसाती · ढैया

जन्म राशि से शनि की गति — 12·1·2 भाव = साढ़ेसाती, 4·8 = ढैया

पंचांग नवमांश दशा गोचर कुंडली मिलान नामाक्षर

साढ़ेसाती की गणना जन्म-चंद्र राशि से होती है — केवल जन्म तिथि व स्थान पर्याप्त है

गोचर-क्रम

तीन चरण · दो ढैया

प्रथम चरण — 12वें भाव

मानसिक चिंता, व्यय, नींद में बाधा, शत्रु-भय। अनावश्यक खर्च व यात्रा से बचें; स्वास्थ्य-अनुशासन रखें।

द्वितीय चरण — चंद्र राशि (1ला भाव)

सबसे गहन चरण — शरीर व मन दोनों पर दबाव। धैर्य, सादगी व हनुमान-चालीसा का नियम लाभदायक।

तृतीय चरण — 2रा भाव

पारिवारिक व आर्थिक विषयों पर दबाव, वाणी-संयम आवश्यक। धीरे-धीरे स्थिति सुधरती है।

पहली ढैया — 4था भाव

अर्धाष्टम शनि — गृह, माता, मानसिक शांति व वाहन-संबंधी विषय। कांतक शनि भी कहलाता है।

दूसरी ढैया — 8वां भाव

अष्टम शनि — स्वास्थ्य, दीर्घकालिक निवेश व गोपनीय विषयों में सावधानी। बीमा-काग़ज़ जाँचें।

शुभ-उपाय

शनिवार व्रत, हनुमान चालीसा, तिल-उड़द दान, वृद्धों व श्रमिकों की सेवा, सूर्यास्त में दीपक।