शनि जब चंद्र-राशि से 12, 1 और 2 — तीनों स्थानों से गुज़रता है, तब लगभग साढ़े सात वर्ष का काल साढ़ेसाती कहलाता है। यहाँ अपनी साढ़ेसाती का आरंभ, तीनों चरण और समाप्ति — वास्तविक शनि-गति से — मिलता है।
जन्म-विवरण बदलिए (तिथि, समय, स्थान) — परिणाम तुरंत उस जन्म-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थितियों के अनुसार फिर गिना जाता है। जन्म-समय जितना सटीक, लग्न व भाव उतने ही सटीक; समय अज्ञात हो तो चंद्र-आधारित विश्लेषण चुनें। यह उपकरण निःशुल्क है और साढ़ेसाती जैसे अन्य उपकरणों के साथ एक ही परीक्षित इंजन से चलता है — आपके जन्म-विवरण किसी प्रोफ़ाइल में संग्रहित नहीं होते।
साढ़ेसाती — यह कैलकुलेटर क्या करता है
- साढ़ेसाती आरंभ-समाप्ति की तिथियाँ
- तीन चरणों का विभाजन — तिथि-सहित
- ढैया (चतुर्थ/अष्टम शनि) के काल
- वर्तमान स्थिति — अभी कौन-सा चरण/बाहर
गणना कैसे काम करती है
आपकी चंद्र-राशि जन्म-स्थिति से; शनि की वास्तविक गोचर-गति (प्रत्येक संक्रमण-क्षण सटीक-खोज से) से तय होता है कि शनि कब 12वीं में घुसा, कब 2वीं से निकला। ढैया चतुर्थ व अष्टम स्थिति के अंतराल से।
गोचर-क्रम
तीन चरण · दो ढैया
प्रथम चरण — 12वें भाव
मानसिक चिंता, व्यय, नींद में बाधा, शत्रु-भय। अनावश्यक खर्च व यात्रा से बचें; स्वास्थ्य-अनुशासन रखें।
द्वितीय चरण — चंद्र राशि (1ला भाव)
सबसे गहन चरण — शरीर व मन दोनों पर दबाव। धैर्य, सादगी व हनुमान-चालीसा का नियम लाभदायक।
तृतीय चरण — 2रा भाव
पारिवारिक व आर्थिक विषयों पर दबाव, वाणी-संयम आवश्यक। धीरे-धीरे स्थिति सुधरती है।
पहली ढैया — 4था भाव
अर्धाष्टम शनि — गृह, माता, मानसिक शांति व वाहन-संबंधी विषय। कांतक शनि भी कहलाता है।
दूसरी ढैया — 8वां भाव
अष्टम शनि — स्वास्थ्य, दीर्घकालिक निवेश व गोपनीय विषयों में सावधानी। बीमा-काग़ज़ जाँचें।
शुभ-उपाय
शनिवार व्रत, हनुमान चालीसा, तिल-उड़द दान, वृद्धों व श्रमिकों की सेवा, सूर्यास्त में दीपक।
