गोचर-क्रम
तीन चरण · दो ढैया
प्रथम चरण — 12वें भाव
मानसिक चिंता, व्यय, नींद में बाधा, शत्रु-भय। अनावश्यक खर्च व यात्रा से बचें; स्वास्थ्य-अनुशासन रखें।
द्वितीय चरण — चंद्र राशि (1ला भाव)
सबसे गहन चरण — शरीर व मन दोनों पर दबाव। धैर्य, सादगी व हनुमान-चालीसा का नियम लाभदायक।
तृतीय चरण — 2रा भाव
पारिवारिक व आर्थिक विषयों पर दबाव, वाणी-संयम आवश्यक। धीरे-धीरे स्थिति सुधरती है।
पहली ढैया — 4था भाव
अर्धाष्टम शनि — गृह, माता, मानसिक शांति व वाहन-संबंधी विषय। कांतक शनि भी कहलाता है।
दूसरी ढैया — 8वां भाव
अष्टम शनि — स्वास्थ्य, दीर्घकालिक निवेश व गोपनीय विषयों में सावधानी। बीमा-काग़ज़ जाँचें।
शुभ-उपाय
शनिवार व्रत, हनुमान चालीसा, तिल-उड़द दान, वृद्धों व श्रमिकों की सेवा, सूर्यास्त में दीपक।
