विक्रम, शक और कलि — तीन समानांतर भारतीय कालगणनाएँ — और ग्रेगोरी। यह परिवर्तक चारों में दोनों दिशाओं में तिथि-स्तर पर बदलाव करता है, पंचांग-नियमों के साथ।
तिथि बदलकर आगे-पीछे की किसी भी तिथि का परिणाम देखा जा सकता है — गणना हर तिथि के वास्तविक खगोलीय आँकड़ों पर होती है, कोई स्थिर-तालिका नहीं। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; संवत् परिवर्तक जैसे सूट के अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित इंजन से चलते हैं।
संवत् परिवर्तक — यह कैलकुलेटर क्या करता है
- ग्रेगोरी ↔ विक्रम संवत् (चंद्र-वर्ष)
- शक संवत् (सौर-वर्ष — भारत-सरकार का राष्ट्रीय कैलेंडर)
- कलि संवत् — गणना-संदर्भ हेतु
- समय-सीमा: तिथि व मास-सीमाएँ
गणना कैसे काम करती है
विक्रम संवत् चंद्र-वर्ष है — चैत्र/कार्तिक आरंभ परंपरा व पूर्णिमांत मास-क्रम से; शक सौर-वर्षण पर चलता है। परिवर्तन तिथि-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थिति से होता है, सिर्फ़ साल-घटाने से नहीं — इसीलिए मास-नाम व सीमाएँ सही आती हैं।
विक्रम संवत् कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली) से, शक संवत् चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा) से बढ़ता है · कलियुग = शक + ३१७९ · कलियुग प्रारंभ: १८ फरवरी ३१०२ ई.पू. (कलि-युग कुल ४,३२,००० वर्ष) · तिथि/माह सूर्योदय से अनुसृत · लहरी अयनांश
विक्रम संवत् और शक संवत् परिवर्तक
विक्रम संवत् भारत का प्राचीन कैलेंडर-युग है जो 57 ई.पू. से चला आ रहा है — अब वर्ष 2083 चल रहा है। शक संवत् 78 ई. से आरंभ हुआ और सरकारी पंचांगों में प्रयुक्त होता है। दोनों के बीच 135 वर्ष का अंतर रहता है।
इस परिवर्तक में आप ग्रेगोरी (अंग्रेज़ी) तिथि को विक्रम संवत् तिथि में और वापस — दोनों दिशाओं में बदल सकते हैं, मास-पक्ष-तिथि के पूरे विवरण सहित।
विक्रम संवत्, शक संवत् और कलियुग — कौन कितना पुराना?
भारत में तीन प्रमुख संवत् चलते हैं। विक्रम संवत् 57 ईसा पूर्व से आरंभ माना जाता है — पंचांग, त्योहार और धार्मिक दस्तावेज़ों में यही प्रचलित है (2026 ई. = 2082–83 वि.स.)। शक संवत् 78 ई. से चलता है और भारत सरकार के आधिकारिक कैलेंडर में उपयोग होता है (2026 ई. = 1947–48 शक)। कलियुग गणना सबसे पुरानी — परंपरा अनुसार 3102 ईसा पूर्व में आरंभ मानी जाती है, अतः अब पाँचवाँ सहस्राब्दी चल रही है।
तीनों का नववर्ष भी अलग-अलग दिन पड़ता है — विक्रमी नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (मार्च-अप्रैल) से, शक नववर्ष 1 चैत्र (सरकारी कैलेंडर) से, और कलियुग की गिनती तो निरंतर है। यही कारण है कि एक ही साल के तीन अलग-अलग नाम-गिनती साथ चलती दिखते हैं।
संवत् बदलने का दिन — और त्योहारों से जुड़ाव
परंपरा में संवत् बदलता है चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को — यही हिंदू नववर्ष है, जिसे गुड़ी पड़वा, उगादी, युगादि जैसे नामों से देश के भिन्न भागों में मनाया जाता है। कुछ परंपराएँ कार्तिक या आषाढ़ से भी वर्ष-गणना आरंभ करती हैं (क्षेत्रीय पंचांगों का फ़र्क़)। दान-पत्र, विवाह-पत्रिका, मुर्ति-प्राण-प्रतिष्ठा के अभिलेखों में आज भी संवत् ही लिखा जाता है — इसलिए ईसवी और संवत् का सही मेल जानना आज भी व्यावहारिक ज़रूरत है। ऊपर का टूल यह मेल खगोलीय गणना से स्वतः करके दिखाता है।
सामान्य प्रश्न
- अभी विक्रम संवत् कौन-सा वर्ष चल रहा है?
- ग्रेगोरी वर्ष में 57 जोड़ें — जनवरी से अप्रैल तक विक्रम संवत् उससे एक अधिक चलता है (क्योंकि विक्रम नववर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा — दीपावली — से आरंभ होता है)।
- शक संवत् का प्रयोग कहाँ होता है?
- भारत सरकार के राजपत्र, कैलेंडर और आकाशवाणी के समाचारों में शक संवत् का ही प्रयोग होता है। इसका नववर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा/उगादी) से आरंभ होता है।
- संवत् का नववर्ष कब होता है?
- विक्रम संवत् का नववर्ष कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के अगले दिन) से, और शक संवत् का चैत्र शुक्ल प्रतिपदा (मार्च-अप्रैल) से आरंभ माना जाता है।