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शुभ मुहूर्त

विवाह · गृह प्रवेश · नामकरण · मुंडन · वाहन क्रय · व्यापार आरंभ — अवसर चुनें, शुभ तिथियाँ पाएँ

पंचांग मुहूर्त कैलेंडर कुंडली मिलान विंशोत्तरी दशा लग्न कुंडली हिंदू कैलेंडर

विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण जैसे संस्कारों के लिए तिथि-वार-नक्षत्र का संगम खोजना होता है। यह उपकरण अगले 90 दिनों में आपके कार्य-प्रकार के अनुकूल तिथियाँ, आपके नगर के अनुसार, क्रम-सहित देता है।

नगर बदलिए — सारी गणना तुरंत उस स्थान के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार फिर हो जाती है; इसीलिए राहु काल, चौघड़िया, होरा जैसे दिन-खंड हर शहर में भिन्न दिखते हैं — और यही सही भी है, क्योंकि दिन की लंबाई स्थान-विशेष है। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; इसी सूट के शुभ मुहूर्त जैसे अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित खगोलीय इंजन से चलते हैं।

शुभ मुहूर्त — यह कैलकुलेटर क्या करता है

गणना कैसे काम करती है

चुने कार्य के शास्त्रीय नियम कोड में हैं: तिथि-परंपरा, वार-संगति, नक्षत्र-सौम्यता, तारा-बल — और विसर्ग जैसे निषेध। स्कैन वास्तविक तिथि-सीमाओं (आपके नगर के सूर्योदय से) पर चलता है, स्थिर-सूची से नहीं।

तिथि-नक्षत्र सूर्योदय पर गिने गए हैं · सामान्य नियम: अमावस्या · चतुर्थी · अष्टमी · नवमी · चतुर्दशी वर्जित · संक्रांति दिवस वर्जित · परंपरागत अंतर संभव · विस्तृत जाँच हेतु ज्योतिषी से परामर्श करें

परिणाम कैसे समझें

पहले अपने कार्य की श्रेणी चुनें — विवाह के नियम नामकरण से भिन्न हैं। मिली तिथियों में से परिवार-सुविधा से चुनें; अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कारों में कुल-पंचांग से अंतिम पुष्टि करें।

ये मान कैसे निकलते हैं

मुहूर्त-शास्त्र के नियम कोड में, तिथियाँ खगोलीय गणना से — विधि विवरण।

मुहूर्त का चयन कैसे होता है?

शुभ मुहूर्त निकालने की वैदिक पद्धति में छों (तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण, चंद्र राशि), तारा-बल, चंद्र-बल और लग्न की शुद्धता — सब देखा जाता है। इस पेज पर आप अपने कार्य का प्रकार चुनें और तिथि-सीमा दें — उपयुक्त मुहूर्त खोजकर दिए जाएँगे।

मुहूर्त केवल तिथि नहीं, समय तक की बात है — उसी दिन के भीतर शुभ लग्न का विशेष घटा-मुहूर्त चुना जाता है। इसीलिए यहाँ हर सुझाव के साथ समय-सीमा भी दी जाती है।

मुहूर्त की गणना में क्या-क्या देखा जाता है?

एक शुभ मुहूर्त कई स्तरों का मिलन है। पहला स्तर पंचांग-दोष — राहु काल, भद्रा, व्यतिपात-वैधृति जैसे योग बाहर रखे जाते हैं। दूसरा स्तर तिथि-वार-नक्षत्र की शुभता — कार्य और नक्षत्र का स्वभाव मिलाया जाता है (विवाह हेतु रोहिणी, मृगशिरा, मघा, पूर्वाषाढ़ा आदि प्रसिद्ध)। तीसरा स्तर लग्न — मुहूर्त-क्षण का उदित लग्न और उसका स्वामी बलवान हो, चंद्रमा प्रबल रहे। चौथा स्तर ग्रह-बल — गुरु-शुक्र जीवन-कारक ग्रहों की बाल-अवस्था (अस्त) न हो। इन सबके बाद ही कोई क्षण "शुभ मुहूर्त" कहलाता है।

इसीलिए तालिका में हर सुझाव के साथ उसका लग्न, तिथि और नक्षत्र दिखाया जाता है — ताकि आप केवल तारीख़ नहीं, पूरा विवरण अपने पुरोहित से मिला सकें।

किस काम के लिए कौन-सा महीना शुभ?

परंपरा में महीनों की अपनी शुभता है। माघ, फाल्गुन, वैशाख विवाह के प्रसिद्ध महीने; गृह-प्रवेश हेतु माघ-फाल्गुन के साथ कार्तिक भी; व्यापार आरंभ हेतु चैत्र-वैशाख (नववर्ष के आसपास) और दिवाली का अभ्यंग-शुभ योग; मुंडन-कर्णवेध हेतु भी उत्तरायण के महीने श्रेष्ठ माने जाते हैं। आषाढ़ और भाद्रपद जैसे महीनों में शुभ कार्य सामान्यतः टाले जाते हैं (मल्य-मास/अधिक-मास की परिस्थितियाँ)। तालिका एक साल आगे की खिड़कियों में ये सारे नियम मिलाकर दिखाती है — जिससे आप पूरे वर्ष के सर्वोत्तम विकल्प एक ही नज़र में तुलना कर सकें।

सामान्य प्रश्न

विवाह मुहूर्त में सबसे महत्वपूर्ण क्या है?
मुहूर्त का लग्न और उसका स्वामी, चंद्रमा की स्थिति और गुरु-शुक्र की बाल-अवस्था सबसे महत्वपूर्ण हैं। साथ ही विवाह के लिए माघ, फाल्गुन आदि के शुभ नक्षत्र-तिथियाँ चुनी जाती हैं।
मुहूर्त निकालते समय कौन-से दोष टाले जाते हैं?
राहु काल, भद्रा (विष्टि) करण, अशुभ योग, तिथि-शून्य, व्यतिपात-वैधृति और पंचक — ये प्रमुख दोष हैं जिन्हें मुहूर्त में बाहर रखा जाता है।
क्या बिना मुहूर्त के काम नहीं होते?
नित्य कार्यों के लिए मुहूर्त आवश्यक नहीं है। पर जीवन के बड़े संस्कार — विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, व्यापार आरंभ — शास्त्रों में मुहूर्त सहित करने का विधान है, जिससे कार्य निर्बाध संपन्न हो।