जन्म-क्षण का आकाशीय स्नैपशॉट ही कुंडली है — लग्न, 12 भाव और नौ ग्रहों की स्पष्ट स्थितियाँ। यहाँ जन्म-विवरण भरते ही पूर्ण D1 कुंडली — चारों चार्ट-शैलियों में — ग्रह-स्पष्ट सहित बनती है।
जन्म-विवरण बदलिए (तिथि, समय, स्थान) — परिणाम तुरंत उस जन्म-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थितियों के अनुसार फिर गिना जाता है। जन्म-समय जितना सटीक, लग्न व भाव उतने ही सटीक; समय अज्ञात हो तो चंद्र-आधारित विश्लेषण चुनें। यह उपकरण निःशुल्क है और लग्न कुंडली जैसे अन्य उपकरणों के साथ एक ही परीक्षित इंजन से चलता है — आपके जन्म-विवरण किसी प्रोफ़ाइल में संग्रहित नहीं होते।
लग्न जन्म-क्षण पर पूर्व-क्षितिज की निरयण दीर्घता से निकलता है — विशेष त्रिकोणमितीय सूत्र से; ग्रह खगोलीय श्रेणियों से, लहरी अयनांश काटकर। भाव लग्न-राशि से क्रम से गिने जाते हैं (पूर्ण-राशि)।
ग्रह
राशि
अंश
नक्षत्र-पद
भाव
गति
गणना लहरी अयनांश · पूर्ण अंक चक्र (whole-sign भाव) · समय IST माना गया है · सूक्ष्म मिनट अंतर से लग्न बदल सकता है
परिणाम कैसे समझें
पहले लग्न व लग्नेश देखें (स्वभाव-दिशा), फिर चंद्र-राशि-नक्षत्र (मन), फिर सूर्य (आत्मबल)। भावों में ग्रहों का वितरण जीवन-क्षेत्र बताता है — किसी भाव में ग्रह न हो तो उसके भावेश की स्थिति देखें।
ये मान कैसे निकलते हैं
स्थितियाँ मानक खगोलीय सिद्धांतों से, लहरी अयनांश से — पूरा विवरण गणना पद्धति में।
लग्न कुंडली — जीवन का आईना
लग्न कुंडली जन्म के क्षण आकाश में पूर्व दिशा से उदित राशि का चित्र है। इसके 12 भाव जीवन के 12 क्षेत्र — शरीर, धन, परिवार, भाग्य, कर्म, मोक्ष — दर्शाते हैं, और 9 ग्रह उन भावों में अपनी शक्ति से फल देते हैं।
जन्म तिथि, समय और स्थान — इन तीनों की सटीकता ही कुंडली की सटीकता है। समय में 4 मिनट का अंतर भी लग्न बदल सकता है। यहाँ अपनी जन्म-विवरण देकर D1 (लग्न) और D9 (नवमांश) दोनों कुंडलियाँ देखें।
कुंडली के 12 भाव — संक्षिप्त मानचित्र
लग्न-कुंडली को ऐसे पढ़ें — 1 (लग्न) व्यक्तित्व व शरीर, 2 धन-वाणी, 3 पराक्रम-भाईबंद, 4 माता-गृह-सुख, 5 संतान-विद्या-पूर्वपुण्य, 6 रोग-शत्रु-ऋण, 7 विवाह-साझेदारी, 8 आयु-गूढ़ विषय, 9 भाग्य-धर्म-गुरु, 10 कर्म-कीर्ति-वृत्ति, 11 लाभ-प्राप्ति, 12 व्यय-मोक्ष। ग्रहों को इन भावों में बैठा देखें, फिर उनके स्वामी को — दो-तीन स्तर गहरे जाने पर ही कुंडली की वास्तविक कथा खुलती है।
रिपोर्ट में ग्रह-अंश (लहरी अयनांश), नक्षत्र-पद, और प्रत्येक ग्रह का भाव-स्थान दिया जाता है — यही तीनों कुंडली-पठन की नींव हैं।
लहरी अयनांश — कुंडली में इसकी भूमिका
आकाश में ग्रह जहाँ हैं, वहाँ हैं — पर कुंडली बनाने के लिए "शून्य-बिंदु" चुनना पड़ता है। भारतीय परंपरा का प्रमुख आधार लहरी (चित्रपक्षीय) अयनांश है — यही सिद्धांत आज सर्वाधिक प्रचलित पंचांगों (द्रिक सहित) में भी है। अयनांश बदलने पर ग्रह का राशि-भाव एक-आध जगह खिसक सकता है — इसीलिए "मेरा ग्रह पश्चिमी सॉफ़्टवेयर में दूसरी राशि दिखा रहा है" जैसा प्रश्न आम है। दोनों गणनाएँ सही होती हैं — आधार भिन्न है। यह सूट भारतीय परंपरा अनुसार लहरी अयनांश पर गणना करता है, और हर ग्रह का अंश-नक्षत्र विवरण देता है ताकि आपकी पत्रिका परंपरागत पंचांगों से ठीक मिले।
सामान्य प्रश्न
जन्म समय पता न हो तो कुंडली बन सकती है?
बनती है, पर लग्न और भाव-फल अनिश्चित रहते हैं। ऐसे में प्रश्न-कुंडली (होरा) या नाम-अक्षर आधारित गणना सहायक होती है। सटीक जन्म समय ज्ञात करवाना सर्वोत्तम है।
लग्न और राशि में अंतर क्या है?
लग्न जन्म-क्षण की उदित राशि है — वह कुंडली की नींव है। राशि चंद्रमा की स्थिति है — वह मन और भाव की है। लग्न शरीर-कर्म दर्शाता है, राशि मन-स्वभाव।
कुंडली में भाव और राशि एक ही चीज़ हैं?
नहीं। राशियाँ 12 आकाश-खंड हैं; भाव जीवन के 12 क्षेत्र हैं। लग्न से गिनकर जो राशि किस भाव में आती है, उसी से फल का मेल बैठता है।