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हिंदू कैलेंडर

तिथि परिवर्तक एवं मासिक दृश्य — विक्रम · शक · ग्रेगोरियन

हिंदू कैलेंडर चंद्र-मास और सौर-वर्ष का मेल है — विक्रम संवत्, मास, पक्ष और तिथि के साथ। यहाँ किसी भी ग्रेगोरी तिथि का हिंदू समकक्ष — और उलटा भी — दोनों दिशाओं में दिखता है।

तिथि बदलकर आगे-पीछे की किसी भी तिथि का परिणाम देखा जा सकता है — गणना हर तिथि के वास्तविक खगोलीय आँकड़ों पर होती है, कोई स्थिर-तालिका नहीं। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; हिंदू कैलेंडर जैसे सूट के अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित इंजन से चलते हैं।

हिंदू कैलेंडर — यह कैलकुलेटर क्या करता है

गणना कैसे काम करती है

प्रत्येक दिन के सूर्योदय-क्षण की तिथि निकाली जाती है (द्रिग्गणित) और पूर्णिमांत क्रम से मास-पक्ष जोड़ा जाता है; संवत् चैत्र-आरंभ विक्रम परंपरा से। अधिक-मास व क्षय-मास जैसे अपवाद स्वतः संभलते हैं।

ग्रेगोरियन → हिंदू
हिंदू → ग्रेगोरियन
मासिक दृश्य

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रविसोममंगलबुधगुरुशुक्रशनि

एकादशी पूर्णिमा / अमावस्या प्रदोष / संकष्टी / अष्टमी

परिणाम कैसे समझें

सूची में एकादशी-पूर्णिमा-अमावस्या पहचानें, पक्ष से व्रत-दिशा तय होती है। संवत्-तिथि पत्रिकाओं/पंचांगों से मिलाते समय नगर एक रखें — तिथि-सीमा स्थान-विशेष है।

ये मान कैसे निकलते हैं

तिथि-शृंखला खगोलीय स्थितियों से, मास-नाम नक्षत्र-परंपरा से — विधि विवरण।

हिंदू (पंचांग) कैलेंडर कैसे काम करता है

हिंदू कैलेंडर चंद्र-मासों पर चलता है — चैत्र से शुरू होकर फाल्गुन पर समाप्त। हर मास में दो पक्ष — शुक्ल (बढ़ता चंद्र) और कृष्ण (घटता चंद्र) — और हर पक्ष में 15 तिथियाँ। मास का नाम उस मास में पड़ने वाली नक्षत्र-स्थिति से पड़ा है।

इस पेज पर आप किसी भी ग्रेगोरी तिथि का हिंदू रूप — विक्रम संवत्, मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, योग, करण — देख सकते हैं, और उलटा हिंदू तिथि से ग्रेगोरी तिथि भी खोज सकते हैं।

हिंदू कैलेंडर की संरचना — मास, पक्ष, तिथि

हिंदू मास चाँद्र है — अमावस्या से अमावस्या तक। प्रत्येक मास के दो पक्ष — शुक्ल (अमावस्या से पूर्णिमा तक, बढ़ता चंद्र) और कृष्ण (पूर्णिमा से अमावस्या तक, घटता चंद्र)। एक पक्ष 15 तिथियों का — प्रतिपदा से चतुर्दशी, फिर पूर्णिमा/अमावस्या। यही संरचना व्रत-त्योहारों की भाषा है — "अष्टमी", "एकादशी", "चतुर्दशी" इसी पक्ष-तिथि गणना से निकलती है।

चाँद्र-मास और सौर-वर्ष में लगभग 11 दिनों का अंतर बचता है, इसलिए परंपरा हर तीसरे वर्ष अधिक-मास (मल्य-मास) जोड़ती है — यही हिंदू कैलेंडर की ऋतु-मेल की चतुराई है, जिससे त्योहार अपनी ऋतु से नहीं हटते।

अमांत-पूर्णिमांत — मास-गणना की दो परंपराएँ

उत्तर भारत की परंपरा पूर्णिमांत है — मास पूर्णिमा से समाप्त/प्रारंभ मानती है (गणेश चतुर्थी का मास भाद्रपद गिना जाता है)। दक्षिण भारत, गुजरात और कई पंचांग अमांत परंपरा चलाते हैं — मास अमावस्या से (वही गणेश चतुर्थी भाद्रपद शुक्ल पक्ष में गिनी जाती है)। दोनों में त्योहार उसी दिन पड़ते हैं — केवल नामकरण भिन्न होता है! यही कारण है कि कुछ त्योहारों का महीना उत्तर/दक्षिण भारत में "भिन्न" सुनाई देता है। इसी प्रकार एकादशी-नाम (मोक्षदा, पापमोचनी…) पूर्णिमांत-परंपरा अनुसार हैं, जो अधिकांश पंचांगों का प्रचलन है। रिपोर्ट में दोनों परंपराओं के मास-नाम साथ दिए जाते हैं, ताकि कोई भ्रम न रहे।

सामान्य प्रश्न

विक्रम संवत् और शक संवत् में अंतर?
विक्रम संवत् 57 ई.पू. से और शक संवत् 78 ई. से चल रहा है। अतः विक्रम संवत् शक संवत् से 135 वर्ष आगे रहता है। सरकारी पंचांगों में शक, जन-समाज में विक्रम संवत् अधिक प्रचलित है।
हिंदू दिन कब से शुरू होता है?
सूर्योदय से। तिथि, वार, नक्षत्र — सबकी गणना सूर्योदय आधारित है। इसीलिए रात 12 बजे नहीं, बल्कि सुबह सूर्योदय पर दिन बदलता है।
पक्ष क्या होता है?
पूर्णिमा से अमावस्या तक घटता चंद्रमा कृष्ण पक्ष और अमावस्या से पूर्णिमा तक बढ़ता चंद्रमा शुक्ल पक्ष कहलाता है। शुक्ल पक्ष शुभ कार्यों के लिए अधिक उत्तम माना जाता है।