होरा प्रत्येक दिन-रात्रि के 24 ग्रह-घंटे हैं — प्रत्येक का अपना स्वामी और अपना कार्य-स्वभाव। वाणिज्य सूक्ष्म ग्रह-घंटों में रखने की परंपरा ही होरा-शास्त्र है।
नगर बदलिए — सारी गणना तुरंत उस स्थान के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार फिर हो जाती है; इसीलिए राहु काल, चौघड़िया, होरा जैसे दिन-खंड हर शहर में भिन्न दिखते हैं — और यही सही भी है, क्योंकि दिन की लंबाई स्थान-विशेष है। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; इसी सूट के शुभ होरा जैसे अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित खगोलीय इंजन से चलते हैं।
शुभ होरा — यह कैलकुलेटर क्या करता है
- 24 होरा — दिन 12 + रात्रि 12 — समय सहित
- प्रत्येक होरा का स्वामी-ग्रह व कार्य-अनुकूलता
- चालू होरा और अगले संक्रमण की स्थिति
- दिन/रात्रि की लंबाई — ऋतु-अनुसार
गणना कैसे काम करती है
आरंभ-होरा वार के स्वामी की होती है (सोमवार → चंद्र), फिर क्रम ग्रह-चक्र में छटानुक्रम (छठा ग्रह) चलता है — यही परंपरागत होरा-क्रम है। दिन-होरा सूर्योदय से, रात्रि-होरा सूर्यास्त से — लंबाई वास्तविक।
दिन के होरे
रात्रि के होरे
होरा-क्रम: प्रथम होरा वार-स्वामी की, फिर चल्देय अनुक्रम (शनि→गुरु→मंगल→सूर्य→शुक्र→बुध→चंद्र) · अवधि = दिन/रात्रि का १/१२ · लहरी अयनांश
होरा — स्वामी ग्रह का समय
होरा शब्द संस्कृत के अहोरात्र से बना है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को 12 भागों में बाँटा जाता है — ये दिन की होराएँ हैं; उसी तरह रात की 12 होराएँ। हर होरा का एक स्वामी ग्रह होता है और उसी ग्रह की शक्ति उस समय में सक्रिय रहती है।
पहली होरा सूर्योदय के दिन के स्वामी से शुरू होती है और फिर ग्रह-क्रम में बारी-बारी सभी सात ग्रह आते जाते हैं। शुक्र और गुरु की होरा धन-लाभ और शुभ कार्यों के लिए, सूर्य की सरकारी व अधिकार-कार्यों के लिए, बुध की व्यापार-लेखा के लिए उत्तम मानी जाती है।
होरा को दिन-प्रधान कामों में ऐसे उपयोग करें
होरा की सबसे बड़ी उपयोगिता "काम की प्रकृति से घंटे का मिलान" है। दफ़्तर/बैंक जैसा दिमाग़ी-व्यापारिक काम सूर्य/बुध/गुरु होरा में, ज़मीन-जायदाद या मशीन से जुड़ा काम मंगल होरा में, कला-मनोरंजन-सौंदर्य का काम शुक्र होरा में, और शोध-गुप्त विषय शनि/चंद्र होरा में बेहतर चलता है। शुभ कार्य आरंभ करने के लिए गुरु-शुक्र-सूर्य-चंद्र-बुध की होरा उत्तम मानी जाती है; मंगल-शनि होरा सावधानी वाले कामों की है।
एक दिन में एक ही ग्रह की होरा दो बार आती है — एक बार दिन में, एक बार रात में। इसलिए अगर सुबह का सुविधाजनक स्लॉट गुरु-होरा से चूक गया, तो दिन भर बाद फिर मौका मिलेगा — तालिका में दोनों दिख जाएँगे।
होरा, चौघड़िया और राहु काल — पहले क्या?
परंपरा में पहले राहु काल बाहर रखा जाता है (वह "कब नहीं" बताता है), फिर बचे समय में चौघड़िया (कौन-सा खंड शुभ है) देखी जाती है, और अंत में होरा से घंटा-स्तर की बारीकी की जाती है — काम की प्रकृति और ग्रह का मिलान। तीनों एक-दूसरे के विरोधी नहीं, तीन स्तर का फ़िल्टर हैं। अगर राहु काल में ही कोई शुभ होरा पड़ रही हो, तो परंपरा राहु काल को ही तरजीह देकर काम टालने कहती है। हमारी तालिकाओं में तीनों पहलू आपस में मिलाकर दिखाए गए हैं, ताकि आपको अलग-अलग जोड़ना न पड़े।
सामान्य प्रश्न
- होरा कितने समय की होती है?
- दिन-भर की कुल अवधि (सूर्योदय से सूर्यास्त) को 12 से भाग देने पर जो समय मिलता है वही एक दिन-होरा है। गर्मियों में यह एक घंटे से अधिक और सर्दियों में कम हो सकती है — यह स्थिर नहीं होती।
- कौन-सी होरा शुभ है?
- गुरु और शुक्र की होरा सबसे शुभ — धन, विवाह, शिक्षा के कार्यों के लिए। सूर्य होरा सरकारी काम और पद-प्राप्ति के लिए, चंद्र होरा मन व जल-संबंधी कार्यों के लिए, बुध होरा व्यापार, लेखा और साक्षात्कार के लिए उत्तम है।
- होरा और चौघड़िया में अंतर क्या है?
- होरा दिन-रात को 12-12 भागों में बाँटती है, चौघड़िया 8-8 भागों में। होरा में ग्रह-शक्ति का विचार गहरा होता है — लग्नेश की होरा विशेष शुभ मानी जाती है, जो चौघड़िया में नहीं देखा जाता।