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राहु काल · यमगंड · गुलिक

दिन के आठ भागों से अशुभ मुहूर्त — परंपरागत वार-अनुक्रम अनुसार

पंचांग शुभ होरा मुहूर्त शुभ मुहूर्त पंचक-गंडमूल संवत्

दिन के आठ भागों में से वार-नियत भाग राहु काल — कार्यारंभ से बचा जाता है; साथ में यमगंड व गुलिक के भाग भी। तीनों के सटीक समय आपके नगर के सूर्योदय-सूर्यास्त से।

नगर बदलिए — सारी गणना तुरंत उस स्थान के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार फिर हो जाती है; इसीलिए राहु काल, चौघड़िया, होरा जैसे दिन-खंड हर शहर में भिन्न दिखते हैं — और यही सही भी है, क्योंकि दिन की लंबाई स्थान-विशेष है। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; इसी सूट के राहु काल · यमगंड · गुलिक जैसे अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित खगोलीय इंजन से चलते हैं।

राहु काल · यमगंड · गुलिक — यह कैलकुलेटर क्या करता है

गणना कैसे काम करती है

सूर्योदय-सूर्यास्त को 8 बराबर भाग बाँटा जाता है; राहु भाग-क्रम वार से नियत (रवि 8वाँ, सोम 2रा…); यम-गुलिक अपने-अपने वार-क्रम से। भागों की लंबाई वास्तविक दिन-लंबाई से — ऋतु-नगर अनुसार बदलती।

आगामी ७ दिन — राहु काल

तिथिवारराहु काल (IST)

राहु/यमगंड/गुलिक = सूर्योदय-सूर्यास्त के ८ समान भागों में वार-विशिष्ट भाग · सूर्योदय −0.833° परालक्ष · स्थानीय समय IST में दर्शाया गया

परिणाम कैसे समझें

शुभ-कार्यारंभ तीनों से बचाकर करें; चालू-चलने वाले कार्य पर रोक नहीं। अभिजीत उपलब्ध हो तो राहु काल के भीतर भी उसे शुभ मानने की परंपरा है।

ये मान कैसे निकलते हैं

विभाजन वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त से, वार-तालिकाएँ परंपरा से — विधि विवरण।

राहु काल, यमगंड और गुलिक — जानकारी

राहु काल प्रत्येक दिन का वह समयखंड है जिसमें कोई भी शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। यह लगभग 90 मिनट का होता है और प्रतिदिन अलग समय पर आता है — सोमवार, शनिवार आदि वार के अनुसार इसका भाग बदलता रहता है।

राहु काल की तरह यमगंड और गुलिक भी अशुभ समय माने जाते हैं — यमगंड में यात्रा और गुलिक में कार्यारंभ टाला जाता है। इस पेज पर आपके शहर के सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार तीनों का सटीक समय दिखता है।

राहु काल के साथ यमगंड और गुलिक — तीनों का फ़र्क़

एक ही दिन के आठ खंडों से तीन अलग-अलग "न करें" समय निकलते हैं। राहु काल सबसे प्रसिद्ध है — नया काम, सफ़र, शुभ आरंभ इसमें टाले जाते हैं। यमगंड उतना प्रसिद्ध नहीं, पर परंपरा में इसे भी आरंभ के लिए अशुभ माना जाता है — विशेषकर यात्रा और दवा जैसे विषयों में। गुलिक काल को कुछ परंपराएँ अशुभ, कुछ उदासीन मानती हैं; अभ्यास में लोग इसे भी बड़े कामों से बाहर रखना पसंद करते हैं। हमारी तालिका तीनों के समय एक साथ दिखाती है, ताकि दिन का सबसे साफ़ खंड आप ख़ुद चुन सकें।

ध्यान रहे — ये तीनों केवल आरंभ के लिए हैं, न कि चल रहे कामों के लिए। राहु काल में शुरू हुआ दफ़्तर का दिन "दोषपूर्ण" नहीं हो जाता; शास्त्र कहते हैं कि नया गृह, नया सौदा, नई यात्रा जैसे आरंभों का समय चुनना ही इनका उद्देश्य है।

राहु काल का समय रोज़ क्यों खिसकता है?

आठ खंडों का विभाजन सूर्योदय-सूर्यास्त से होता है, और वह रोज़ बदलता है। सर्दियों में सूर्योदय देर से होने पर राहु काल भी पीछे खिसक जाता है। साथ ही वार-क्रम भी तय करता है कि आठ में से कौन-सा खंड राहु का होगा — रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ… इसीलिए "राहु काल हमेशा 3 से 4:30" जैसी बातें ग़लत होती हैं। लखनऊ और दिल्ली का राहु काल भी मिनटों से भिन्न होगा, क्योंकि सूर्योदय भिन्न होता है। इसीलिए परंपरा कहती है — पंचांग अपने शहर का देखो।

सामान्य प्रश्न

राहु काल में क्या नहीं करना चाहिए?
विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश, नई खरीद, व्यापार आरंभ और यात्रा जैसे शुभ कार्य राहु काल में टाले जाते हैं। नित्य के सामान्य काम — ऑफिस जाना, स्कूल — इससे प्रभावित नहीं माने जाते।
राहु काल हर दिन एक ही समय पर क्यों नहीं आता?
क्योंकि इसका भाग वार के अनुसार तय है (सोमवार को दूसरा, मंगलवार को सातवाँ आठवाँ भाग आदि) और प्रत्येक भाग की अवधि सूर्योदय-सूर्यास्त पर निर्भर है, जो मौसम और स्थान से बदलती रहती है।
गुलिक और यमगंड से बचाव कैसे?
इन समयों में शुभ कार्य टालकर बाद के समय में करें। यदि टलना संभव न हो तो पहले भगवती का स्मरण कर कार्य आरंभ करने का विधान है — पर सर्वोत्तम यही है कि शुभ कार्य इन समयों से बाहर किए जाएँ।