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अष्टकवर्ग

सर्वाष्टकवर्ग · भिन्नाष्टकवर्ग · ग्रह-बल — कुल 337 बिंदु

लग्न कुंडली विंशोत्तरी दशा ग्रह गोचर कुंडली मिलान दोष · कालसर्प

ग्रह-बल का गणितीय विस्तार — अष्टकवर्ग। आठ संदर्भ-ग्रहों की दृष्टि से प्रत्येक ग्रह के लिए राशि-बिंदु (भिन्नाष्टकवर्ग) और उनका योग (सर्वाष्टकवर्ग) — गोचर-फल का सबसे वस्तुनिष्ठ आधार।

जन्म-विवरण बदलिए (तिथि, समय, स्थान) — परिणाम तुरंत उस जन्म-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थितियों के अनुसार फिर गिना जाता है। जन्म-समय जितना सटीक, लग्न व भाव उतने ही सटीक; समय अज्ञात हो तो चंद्र-आधारित विश्लेषण चुनें। यह उपकरण निःशुल्क है और अष्टकवर्ग जैसे अन्य उपकरणों के साथ एक ही परीक्षित इंजन से चलता है — आपके जन्म-विवरण किसी प्रोफ़ाइल में संग्रहित नहीं होते।

अष्टकवर्ग — यह कैलकुलेटर क्या करता है

गणना कैसे काम करती है

पराशर-तालिका के अनुसार प्रत्येक ग्रह के लिए 8 संदर्भ-स्थितियों से राशि-दर-राशि बिंदु जोड़े जाते हैं (कुल 337); योग से SAV बनता है। तालिकाएँ सत्यापित हैं — योग प्रत्येक ग्रह हेतु नियत रहता है।

कच्चे बिंदु (त्रिकोण/एकाधिपत्य शोधन के बिना) — पराशर मानक, कुल 337

अष्टकवर्ग कैसे पढ़ें —

सर्वाष्टकवर्ग (SAV): सात ग्रहों के भिन्नाष्टकवर्ग बिंदु जोड़कर प्रत्येक राशि का कुल बल निकलता है — 25 या अधिक बिंदु वाली राशि से गुजरने वाले ग्रह अनुकूल फल देते हैं; 20 से कम वाली राशि कमजोर मानी जाती है। भिन्नाष्टकवर्ग (BAV): प्रत्येक ग्रह का अलग-अलग योगदान — पंक्ति में वही कोठरी हाइलाइट है जिस राशि में ग्रह स्थित है।

गोचर-निर्णय: ग्रह जिस राशि से गुजरे, उस राशि के SAV बिंदु देखें; उसके अगली-पिछली राशि (विशेषतः कुम्भ व वृश्चिक — कड़क राशियाँ) भी ध्यान में रखें। यह गणना कच्चे बिंदुओं पर है — त्रिकोण व एकाधिपत्य शोधन लागू नहीं की गई, जो गोचर व बल-निर्धारण के लिए मानक है।

परिणाम कैसे समझें

SAV 28+ वाली राशियाँ बलवान, 25− दुर्बल मानी जाती हैं; गोचर उसी राशि में हो तो फल बिंदु-अनुरूप। बिंदु ग्रह-स्वभाव से नहीं, संख्या-संतुलन से बोलते हैं — यही इसकी शक्ति है।

ये मान कैसे निकलते हैं

बिंदु-तालिकाएँ भृहत्पाराशर से, दो स्वतंत्र कार्यान्वयनों से सत्यापित — विधि विवरण।

अष्टकवर्ग — ग्रह-बल का सबसे बारीक मापदंड

वैदिक ज्योतिष में ग्रह का फल देखते समय उसकी स्थिति, दृष्टि और दशा के अतिरिक्त उसका बल भी देखा जाता है। अष्टकवर्ग बल-निर्धारण की सबसे बारीक पद्धति है, जिसका वर्णन महर्षि पराशर के बृहत्पराशर होरा शास्त्र में मिलता है। इसमें सात ग्रहों (सूर्य से शनि तक) की स्थिति को आठ संदर्भों — स्वयं तथा शेष छह ग्रह और लग्न — से देखकर प्रत्येक राशि को शुभ बिंदु (बेनेफिक पॉइंट्स) दिए जाते हैं। एक ग्रह के अष्टक के सभी बिंदुओं का योग सर्वदा नियत रहता है — सूर्य 48, चंद्र 49, मंगल 39, बुध 54, गुरु 56, शुक्र 52 और शनि 39 — अतः कुल 337 बिंदु बनते हैं।

इस पृष्ठ पर दो तालिकाएँ दिखाई जाती हैं। पहली भिन्नाष्टकवर्ग (BAV) — प्रत्येक ग्रह का बारह राशियों में अलग-अलग योगदान, जिससे पता चलता है कि किस ग्रह का अष्टक किस राशि को बल देता है। दूसरी सर्वाष्टकवर्ग (SAV) — सातों का जोड़, जो राशि का कुल बल बताता है। साथ में प्रत्येक ग्रह की वर्तमान स्थिति में अपने-अष्टक बिंदु और उस राशि का SAV भी दिखाया जाता है, जिससे ग्रह का सामान्य/प्रबल/निर्बल निर्णय सीधे दिख जाता है।

गोचर-फल की परंपरा इसी पर चलती है: ग्रह जिस राशि से गुजरता है, वहाँ के बिंदु उतने ही अनुकूल परिणाम दर्शाते हैं। बिंदु 25 या अधिक हों तो गोचर के शुभ फल पूरे मिलते हैं, 20–24 में मिश्रित, और 20 से कम में ग्रह अपने शुभ फल देने में संघर्ष करता है। असली उपयोगी बात यह है कि ये बिंदु जन्म-कुंडली से बनते हैं और जीवन भर स्थिर रहते हैं — बदलता केवल गोचर का ग्रह है। इसीलिए एक बार गणना कर लेने पर यह तालिका सालों-साल साथ चलती है।

सामान्य प्रश्न

अष्टकवर्ग क्या बताता है?
7 ग्रहों को 8 संदर्भों (सात ग्रह + लग्न) से गणना कर राशियों को शुभ बिंदु दिए जाते हैं। सर्वाष्टकवर्ग में सब जोड़कर कुल 337 बिंदु बनते हैं — जिस राशि में बिंदु अधिक, वहाँ से गुजरने वाले ग्रह अनुकूल फल देते हैं।
क्या बिंदु समय के साथ बदलते हैं?
नहीं। बिंदु जन्म-कुंडली की ग्रह-स्थिति से बनते हैं और स्थिर रहते हैं; केवल गोचर के ग्रह बदलते हैं। इसीलिए गोचर-फल का पूर्वानुमान लगाने के लिए यह तालिका बार-बार काम आती है।
कड़क राशियाँ कौन-सी हैं?
कुम्भ और वृश्चिक को कड़क (तीव्र) राशियाँ कहा जाता है — इनके बिंदु के अनुपात में फल अधिक तीव्रता से अनुभव होता है। गोचर-निर्णय में इन्हें विशेष भार दिया जाता है।