Vedic AstroPack
✦  GoPixel  ✦

शुभ मुहूर्त कैलेंडर

ब्रह्म मुहूर्त से चोघड़िया तक — दिन की हर शुभ-अशुभ घड़ी

पंचांग त्योहार कैलेंडर व्रत-उपवास ग्रह गोचर हिंदू कैलेंडर कुंडली

पूरे महीने की शुभ-अशुभ तिथियाँ एक नज़र में — कौन-सा दिन विवाह के अनुकूल, कौन-सा गृह प्रवेश के, और कौन-से दिन बड़े कार्य टालने योग्य।

नगर बदलिए — सारी गणना तुरंत उस स्थान के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार फिर हो जाती है; इसीलिए राहु काल, चौघड़िया, होरा जैसे दिन-खंड हर शहर में भिन्न दिखते हैं — और यही सही भी है, क्योंकि दिन की लंबाई स्थान-विशेष है। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; इसी सूट के मुहूर्त कैलेंडर जैसे अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित खगोलीय इंजन से चलते हैं।

मुहूर्त कैलेंडर — यह कैलकुलेटर क्या करता है

गणना कैसे काम करती है

माह की प्रत्येक तिथि के लिए वही मुहूर्त-नियम चलते हैं जो शुभ मुहूर्त खोज में हैं — तिथि-वार-नक्षत्र संगत — और परिणाम कैलेंडर-रूप में बिछ जाता है। तिथि-सीमाएँ आपके नगर के सूर्योदय से।

दिन की चोघड़िया

रात की चोघड़िया

सप्ताह भर

अगले 7 दिन का सार

तिथिब्रह्म मुहूर्तअभिजीतराहु काल

मुहूर्त सूर्योदय/सूर्यास्त पर आधारित · विवाह, गृहप्रवेश जैसे विशेष कार्य हेतु अपने कुल पुरोहित से परामर्श करें

परिणाम कैसे समझें

हरे/शुभ चिह्न वाले दिनों में से चुनें; सामान्य निषेध-दिन बड़े कार्यों से बचें। माह में कोई अनुकूल तिथि न मिले तो पड़ोसी माह देखें।

ये मान कैसे निकलते हैं

तिथियाँ खगोलीय, नियम शास्त्रीय — विधि विवरण।

शुभ मुहूर्त कैलेंडर — कैसे पढ़ें

वैदिक मुहूर्त शास्त्र में किसी भी कार्य के लिए तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण और चंद्र राशि — छों का मेल देखा जाता है। इनके अनुकूल संगम ही शुभ मुहूर्त कहलाता है। इस कैलेंडर में आगामी दिनों के शुभ-अशुभ संकेत एक नज़र में दिखते हैं।

विवाह, गृह प्रवेश, वाहन खरीद या नए कार्य की शुरुआत — किसी भी बड़े निर्णय से पहले यहाँ से उपयुक्त तिथि चुनें और फिर उस दिन के शुभ घंटे देखकर कार्य आरंभ करें।

एक साल के शुभ अवसर — एक नज़र में

अलग-अलग संस्कारों के लिए अलग-अलग तालिकाएँ देखना थकाऊ होता है, इसलिए यह कैलेंडर पूरे वर्ष को एक बार में दिखाता है — कौन-सा महीना किस संस्कार के लिए सघन है, कहाँ "मुहूर्त-सून्य" (अशुभ महीने) पड़ रहे हैं, और कहाँ लगातार दिनों तक विकल्प मिल रहे हैं। यह दृष्टि विशेषकर विवाह-प्रस्ताव तय करने वाले परिवारों के लिए उपयोगी है — पहले बड़ी खिड़की चुनिए, फिर उस खिड़की में विस्तृत मुहूर्त निकलवाइए।

कैलेंडर पढ़ते समय दो बातें याद रखें — एक, यह दृष्टि "पंचांग-स्तर" की है; अंतिम मुहूर्त आपके कुल-परंपरा और जातक की कुंडली से मिलाकर ही होता है। दो, तिथियाँ सूर्योदय-आधारित हैं, इसलिए शहर बदलने पर एक-आध दिन खिसक सकता है — अपना शहर ऊपर चुनकर ताज़ा गणना देखें।

मुहूर्त-सून्य अवधि क्यों आती है?

कुछ महीनों में शुभ कार्य सामान्यतः नहीं किए जाते — आषाढ़ (शुक्र की अस्त-अवस्था से जुड़ी परंपरा), भाद्रपद (मल्य-मास की गणना), अधिक-मास, और खर्मास कही जाने वाली अवधियाँ। इनके पीछे खगोलीय तर्क है — ग्रहों की दृश्यता-अवस्था मुहूर्त-बल का भाग है, और सूर्य-ग्रहण/अस्त के समय परंपरा मंगल-कार्य रोकती है। इन अवधियों में गृह-प्रवेश, विवाह, व्यापार-प्रारंभ जैसे काम प्रायः आगे-पीछे करके शुभ महीनों में रखे जाते हैं। तालिका में ये खाली/कम खिड़कियाँ दिखना दोष नहीं — शास्त्र-सम्मत अवकाश है।

सामान्य प्रश्न

मुहूर्त चुनते समय सबसे पहले क्या देखें?
सबसे पहले तिथि और वार — अमावस्या, चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अधिक-तिथियाँ शुभ कार्यों के लिए वर्जित मानी जाती हैं। इसके बाद नक्षत्र-योग-करण की छों देखी जाती है।
गृह प्रवेश के लिए कौन-सी तिथियाँ श्रेष्ठ हैं?
शुक्ल पक्ष की द्वितीय, तृतीय, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी और त्रयोदशी गृह प्रवेश के लिए उत्तम मानी जाती हैं। साथ में गुरु-शुक्र का बाल-अवस्था न होना भी देखा जाता है।
मुहूर्त में राहु काल का क्या महत्व है?
चाहे तिथि कितनी भी शुभ हो, कार्य राहु काल में आरंभ नहीं करना चाहिए। मुहूर्त निकालते समय राहु काल, यमगंड और गुलिक — तीनों को बाहर रखा जाता है।