108 वर्ष की अष्टोत्तरी दशा — केतु को छोड़कर 8 ग्रहों की प्रणाली। इसकी सुंदर गणित: 27 नक्षत्र × 4 पद = 108 पदा ↔ 108 वर्ष। कृष्ण-पक्ष जन्मों पर विशेष प्रयोग।
जन्म-विवरण बदलिए (तिथि, समय, स्थान) — परिणाम तुरंत उस जन्म-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थितियों के अनुसार फिर गिना जाता है। जन्म-समय जितना सटीक, लग्न व भाव उतने ही सटीक; समय अज्ञात हो तो चंद्र-आधारित विश्लेषण चुनें। यह उपकरण निःशुल्क है और अष्टोत्तरी दशा जैसे अन्य उपकरणों के साथ एक ही परीक्षित इंजन से चलता है — आपके जन्म-विवरण किसी प्रोफ़ाइल में संग्रहित नहीं होते।
अष्टोत्तरी दशा — यह कैलकुलेटर क्या करता है
- जन्म-पदा व प्रथम ग्रह
- 8 महादशा — सूर्य 6 से शुक्र 21 — पूर्ण तालिका
- प्रत्येक की अंतर्दशा
- चालू ग्रह-काल व जन्म-शेष
गणना कैसे काम करती है
28-पदा का ग्रह-चक्र (पापग्रह 4 पद, शुभ 3) 28-नक्षत्र मंडल पर चलता है; जन्म-पदा से चालू ग्रह और अनुपातिक शेष निकलता है — 108 पदाओं और 108 वर्षों की समरूपता ही इस पद्धति का आधार है।
पदा-चक्र: सूर्य 4 · चंद्र 3 · मंगल 4 · बुध 3 · शनि 4 · गुरु 3 · राहु 4 · शुक्र 3 — आर्द्रा चरण-1 से
चक्र: 27 नक्षत्र × 4 चरण = 108 पदा ↔ 108 वर्ष — इसी लिए इसे अष्टोत्तरी कहते हैं। 28-पदा का चक्र बार-बार दोहराता है (पापग्रह 4 चरण, शुभग्रह 3)। अवधि: सूर्य 6, चंद्र 15, मंगल 8, बुध 17, शनि 10, गुरु 19, राहु 12, शुक्र 21 वर्ष। क्रम: जन्म-पदा से जो ग्रह चल रहा हो, उसके बाद यही क्रम दोहराया जाता है।
प्रयोग: परंपरा में कृष्ण-पक्ष जन्म पर विशेष उपयोगी मानी जाती है; विंशोत्तरी के साथ पारस्परिक पुष्टि (cross-verification) के लिए देखी जाती है। चालू महादशा (●) और उसकी अंतर्दशा से वर्तमान काल की प्रवृत्ति पढ़ें।
