Vedic AstroPack
✦  GoPixel  ✦

अष्टोत्तरी दशा

108-वर्ष चक्र · 8 ग्रह (केतु रहित) · महादशा-अंतर्दशा

विंशोत्तरी दशा योगिनी दशा वर्षफल लग्न कुंडली साढ़ेसाती

108 वर्ष की अष्टोत्तरी दशा — केतु को छोड़कर 8 ग्रहों की प्रणाली। इसकी सुंदर गणित: 27 नक्षत्र × 4 पद = 108 पदा ↔ 108 वर्ष। कृष्ण-पक्ष जन्मों पर विशेष प्रयोग।

जन्म-विवरण बदलिए (तिथि, समय, स्थान) — परिणाम तुरंत उस जन्म-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थितियों के अनुसार फिर गिना जाता है। जन्म-समय जितना सटीक, लग्न व भाव उतने ही सटीक; समय अज्ञात हो तो चंद्र-आधारित विश्लेषण चुनें। यह उपकरण निःशुल्क है और अष्टोत्तरी दशा जैसे अन्य उपकरणों के साथ एक ही परीक्षित इंजन से चलता है — आपके जन्म-विवरण किसी प्रोफ़ाइल में संग्रहित नहीं होते।

अष्टोत्तरी दशा — यह कैलकुलेटर क्या करता है

गणना कैसे काम करती है

28-पदा का ग्रह-चक्र (पापग्रह 4 पद, शुभ 3) 28-नक्षत्र मंडल पर चलता है; जन्म-पदा से चालू ग्रह और अनुपातिक शेष निकलता है — 108 पदाओं और 108 वर्षों की समरूपता ही इस पद्धति का आधार है।

पदा-चक्र: सूर्य 4 · चंद्र 3 · मंगल 4 · बुध 3 · शनि 4 · गुरु 3 · राहु 4 · शुक्र 3 — आर्द्रा चरण-1 से

अष्टोत्तरी दशा कैसे पढ़ें —

चक्र: 27 नक्षत्र × 4 चरण = 108 पदा ↔ 108 वर्ष — इसी लिए इसे अष्टोत्तरी कहते हैं। 28-पदा का चक्र बार-बार दोहराता है (पापग्रह 4 चरण, शुभग्रह 3)। अवधि: सूर्य 6, चंद्र 15, मंगल 8, बुध 17, शनि 10, गुरु 19, राहु 12, शुक्र 21 वर्ष। क्रम: जन्म-पदा से जो ग्रह चल रहा हो, उसके बाद यही क्रम दोहराया जाता है।

प्रयोग: परंपरा में कृष्ण-पक्ष जन्म पर विशेष उपयोगी मानी जाती है; विंशोत्तरी के साथ पारस्परिक पुष्टि (cross-verification) के लिए देखी जाती है। चालू महादशा (●) और उसकी अंतर्दशा से वर्तमान काल की प्रवृत्ति पढ़ें।

परिणाम कैसे समझें

परंपरा में यह विंशोत्तरी के साथ पुष्टि-दोहरा फ़िल्टर है — दोनों एक ही संकेत दें तो निर्णय दृढ़ होता है। केतु का भाव राहु-काल में समाहित मानने की परंपरा है।

ये मान कैसे निकलते हैं

पदा-क्रम शास्त्रीय समुचित विभाजन से (स्रोत-जाँचित) — विधि विवरण।

अष्टोत्तरी दशा क्या है?

अष्टोत्तरी (अष्ट = आठ, उत्तर = शेष/विस्तार) एक 108 वर्ष की दशा-पद्धति है जिसमें केतु को छोड़कर आठ ग्रह चलते हैं। इसकी सबसे सुंदर गणितीय बात यह है कि 27 नक्षत्रों के 4-4 चरण मिलाकर कुल 108 पदा बनते हैं — और चक्र भी 108 वर्ष का है। पदा-विभाजन में पापग्रह (सूर्य, मंगल, शनि, राहु) को 4-4 चरण और शुभग्रह (चंद्र, बुध, गुरु, शुक्र) को 3-3 चरण मिलते हैं, जिससे 28-पदा का चक्र बनता है — यही चक्र 28-नक्षत्र मंडल (27 + अभिजीत) पर बार-बार घूमता है।

शास्त्रों में इस दशा का प्रयोग विशेष रूप से कृष्ण-पक्ष (घटते चंद्र) के जन्मों पर सुझाया गया है। व्यवहार में ज्योतिषी इसे विंशोत्तरी के समानांतर चलाते हैं — जब दोनों पद्धतियाँ एक ही घटना की ओर संकेत करें, तब भविष्यवाणी की पुष्टि मानी जाती है।

महादशा अवधियाँ और अर्थ

सूर्य 6 वर्ष (सत्ता, स्वास्थ्य, पिता-पक्ष) · चंद्र 15 वर्ष (मन, माता-पक्ष, जन-संपर्क) · मंगल 8 वर्ष (ऊर्जा, भूमि, साहस) · बुध 17 वर्ष (वाणी, व्यापार, शिक्षा) · शनि 10 वर्ष (श्रम, धैर्य, सीमाएँ) · गुरु 19 वर्ष (ज्ञान, धर्म, विस्तार) · राहु 12 वर्ष (विदेश, तकनीक, उथल-पुथल) · शुक्र 21 वर्ष (सुख, कला, दांपत्य)। प्रत्येक महादशा के भीतर आठ अंतर्दशा होती हैं जिनकी अवधि महादशा × ग्रह-वर्ष ÷ 108 के अनुपात में होती है।

जन्म-शेष कैसे निकलता है?

चंद्रमा जिस नक्षत्र-पदा में हो, उस पदा से शुरू होने वाला ग्रह-क्रम देखा जाता है। उस पदा-खंड में चंद्रमा जितना आगे बढ़ चुका है, उसके अनुपात से चालू ग्रह की अवधि का जितना हिस्सा बीत चुका माना जाता है — शेष भाग जन्म के बाद चलता है। यही "जन्म-शेष" है, जो ऊपर परिणाम में वर्षों में दिखाया जाता है।

सामान्य प्रश्न

अष्टोत्तरी और विंशोत्तरी में क्या अंतर है?
विंशोत्तरी 120 वर्ष और 9 ग्रहों (केतु सहित) की है; अष्टोत्तरी 108 वर्ष और 8 ग्रहों की। नक्षत्र-ग्रह मैपिंग भी भिन्न है और अवधियाँ भी — इसीलिए दोनों मिलकर पुष्टि का दोहरा फ़िल्टर बनाती हैं।
मेरी जन्म-दशा कैसे पता करें?
ऊपर जन्म-तिथि, समय और स्थान भरें — चंद्रमा की स्थिति से चालू महादशा, जन्म-शेष और पूरी समय-सारिणी स्वतः दिख जाएगी।
क्या यह विंशोत्तरी की जगह ले सकती है?
जगह नहीं — साथ। परंपरा में अष्टोत्तरी को सहायक पद्धति माना गया है, विशेषतः कृष्ण-पक्ष जन्मों के लिए। मुख्य विश्लेषण विंशोत्तरी से ही होता है।
केतु क्यों नहीं है?
क्लासिकल व्याख्या: 8 ग्रहों की अवधियों का योग 108 बनाने के लिए केतु का कोई स्वतंत्र भाग नहीं रखा गया; कुछ विद्वान केतु का प्रभाव राहु की अवधि में समाहित मानते हैं।