दक्षिण भारत की विवाह-मिलान परंपरा — दशापोरुत्तम के दस पोरुत्तम। उत्तर के 36-गुण से पद्धति भिन्न है; यहाँ दिनम से स्त्री-दीर्घम तक दसों, रज्जु-वेध अवरोधक सहित।
जन्म-विवरण बदलिए (तिथि, समय, स्थान) — परिणाम तुरंत उस जन्म-क्षण की वास्तविक खगोलीय स्थितियों के अनुसार फिर गिना जाता है। जन्म-समय जितना सटीक, लग्न व भाव उतने ही सटीक; समय अज्ञात हो तो चंद्र-आधारित विश्लेषण चुनें। यह उपकरण निःशुल्क है और पोरुत्तम (दक्षिण-भारतीय मिलान) जैसे अन्य उपकरणों के साथ एक ही परीक्षित इंजन से चलता है — आपके जन्म-विवरण किसी प्रोफ़ाइल में संग्रहित नहीं होते।
पोरुत्तम (दक्षिण-भारतीय मिलान) — यह कैलकुलेटर क्या करता है
- 10 पोरुत्तम — दिनम, गणम, योनि, राशि, राश्याधिपति, रज्जु, वेध, वस्य, महेंद्रम, स्त्री-दीर्घम
- प्रत्येक का उत्तम/मध्यम/निषेध
- अवरोधक (blockers) — रज्जु व वेध
- समग्र निर्णय — दक्षिण परंपरा अनुसार
गणना कैसे काम करती है
दोनों के जन्म-नक्षत्र (व पद जहाँ लागू) पर तमिल-परंपरा की तालिकाएँ चलती हैं; रज्जु (नाड़ी-सदृश) व वेध (योनि-विरोध) निषेध हों तो प्रवेश-पूर्व अवरोध दिखाया जाता है।
दिन (तारा), गण, योनि, राशि, राश्याधिपति, रज्जु (शरीर-बंधन), वेध (नक्षत्र-सामना), वश्य (आकर्षण), महेंद्र (संतान-सुख) और स्त्री-दीर्घ (वधू की दीर्घायु) — दसों गुण एक साथ देखे जाते हैं। रज्जु व वेध अवरोधक हैं: ये दोष रहने पर शेष अंक चाहे कितने भी हों, परंपरा में विवाह टाला जाता है।
उत्तर-भारतीय अष्टकूट-मिलान के लिए कुंडली मिलान पेज देखें — दोनों पद्धतियाँ एक-दूसरे के पूरक हैं।
