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वैदिक पंचांग सूट

गणना पद्धति और सत्यापन

इस पृष्ठ पर हमारी गणना-प्रणाली की पूरी पारदर्शी रूपरेखा है — कौन विकसित करता है, किन खगोलीय सिद्धांतों और शास्त्रीय नियमों पर चलती है, परिणाम कैसे जाँचे जाते हैं, और जहाँ मान भिन्न हो सकते हैं वहाँ हम क्या मानते हैं। विश्वास दावे से नहीं, जानकारी से अर्जित होता है — इसीलिए यह विवरण सार्वजनिक है।

कौन विकसित करता है

गणना-इंजन GoPixel (लखनऊ, भारत — https://gopixel.in) की इन-हाउस टीम ने विकसित किया है और उसी का रखरखाव करती है। कोई तीसरे पक्ष का खगोलीय सेवा-इंजन इस्तेमाल नहीं होता — ग्रह-स्थितियों से लेकर दशा-तालिकाओं तक सारा गणित हमारे अपने कोड में है, इसलिए किसी भी स्तर पर उसका ऑडिट और सुधार हमारे नियंत्रण में है।

विधि (Methodology)

खगोलीय आधार: ग्रहों की स्थितियाँ मानक खगोलीय सिद्धांतों की त्रिकोणमितीय श्रेणियों से निकलती हैं — सूर्य-पथ हेतु VSOP87-शैली श्रेणियाँ, चंद्र हेतु ELP-परंपरा की श्रेणियाँ, और बाह्य ग्रहों (अरुण, वरुण, यम) हेतु JPL (नासा जेट-प्रोपल्शन लैब) के Standish दीर्घ-अवधि तत्व। ये वही गणितीय आधार हैं जिन पर व्यापक रूप से प्रयुक्त खगोलीय लाइब्रेरियाँ बनी हैं।

निरयण-रूपांतरण: भारतीय परंपरा के अनुसार लहरी (चित्रपक्षीय) अयनांश लगाया जाता है — वही आधार जो सर्वाधिक प्रचलित भारतीय पंचांगों में है।

पंचांग-तत्व: तिथि, नक्षत्र, योग और करण चंद्र-सूर्य की आपसी दीर्घता के अंतर से — शास्त्रीय 12°/13°20′/60°/6° नियमों पर; दिन का आरंभ उस स्थान के सूर्योदय से (द्रिग्गणित परंपरा)। सूर्योदय-सूर्यास्त 0.833° मानक निम्नन (वायुमंडलीय अपवर्तन सहित) पर।

विशेष गणनाएँ: ग्रहण-भविष्यवाणी पूर्ण छाया-ज्यामिति से (स्पर्श/मध्य/मोक्ष तथा दृश्यता हेतु topocentric सुधार); सौर-वर्षण (वर्षफल) और तिथि-सीमाएँ सटीक-खोज (bisection) से। जहाँ शास्त्रीय तालिकाएँ चाहिए (अष्टकूट, पंचक, गंडमूल, होरा-चौघड़िया, योगिनी-अष्टोत्तरी अवधियाँ) वहाँ प्रामाणिक ग्रंथों के नियम कोड में लिखे गए हैं — अनुमानित लुक-अप नहीं।

परिणाम कैसे जाँचे जाते हैं

विसंगतियाँ कैसे संभाली जाती हैं

हर गणना-प्रकार की सहनशीलता-सीमा तय है (सूर्योदय ±2 मिनट, ग्रह-स्पष्ट ±2 आर्कमिनट, तिथि/संक्रांति-सीमा पर कुछ मिनट)। मिलान-परीक्षण में कोई मान सीमा से बाहर हो तो: (1) दोनों ओर की गणना-पद्धति स्रोत-दर-स्रोत जाँची जाती है, (2) निर्णय सबसे स्थापित संदर्भ के पक्ष में होता है, (3) सुधार प्रतिगमन-सूट में स्थायी जाँच बन जाता है। जहाँ अंतर गणना-त्रुटि नहीं, परंपरा-भेद है (जैसे एकादशी के स्मार्त/वैष्णव विधान), वहाँ हम अपना आधार स्पष्ट बता देते हैं — चुपचाप एक को शुद्ध नहीं ठहराते।

समीक्षा कब-कब होती है

प्रत्येक सॉफ़्टवेयर-प्रकाशन पर पूरा प्रतिगमन-सूट चलता है (यही मुख्य ढाल है)। इसके अतिरिक्त नियमित स्पॉट-जाँच — चालू माह के पंचांग और आगामी ग्रहण — संदर्भ-स्रोतों से मिलाए जाते हैं, और अयनांश-मान तथा दीर्घ-अवधि ग्रहण-भविष्यवाणियाँ वर्ष में कम-से-कम एक बार पुनः जाँची जाती हैं।

किन परंपराओं पर चलते हैं

अयनांश: लहरी (चित्रपक्षीय)। दिन-गणना: सूर्योदय से सूर्योदय (द्रिग्गणित)। मास: उत्तर भारत के लिए पूर्णिमांत, दक्षिण भारत के लिए अमांत — संबंधित उपकरणों में जहाँ लागू हो, दोनों उपलब्ध। व्रत-विधान: प्रमुख स्मार्त प्रथा; जिन तिथियों पर वैष्णव परंपरा भिन्न दिन रखती है (एकादशी आदि), वहाँ उल्लेख किया जाता है। चार्ट-शैली: उत्तर/दक्षिण/पूर्व/पश्चिम चारों कुंडली-चित्रण परंपराएँ।

मुख्य मान्यताएँ (Assumptions)

ईमानदार सीमा — यह सूट व्यावहारिक उच्च सटीकता के लिए बना है: खगोलीय स्थितियाँ और शास्त्रीय नियम, सार्वजनिक संदर्भों से मिलाकर। यह "100% सटीक" जैसा दावा नहीं करता — कोई गणना-प्रणाली नहीं कर सकती। अत्यंत महत्वपूर्ण संस्कारों (विवाह आदि) के लिए अपने कुल-पंचांग या योग्य ज्योतिषी से अंतिम पुष्टि करें — अस्वीकरण देखें।

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