पंचांग समय को पाँच अंगों — तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण — में मापता है, और इन्हीं पाँचों का संगम व्रत-पारण, मुहूर्त और दैनिक शुभ-अशुभ का आधार है। यहाँ आज का पूरा पंचांग आपके अपने शहर के सूर्योदय-समयानुसार एक ही जगह दिखता है।
नगर बदलिए — सारी गणना तुरंत उस स्थान के वास्तविक सूर्योदय-सूर्यास्त के अनुसार फिर हो जाती है; इसीलिए राहु काल, चौघड़िया, होरा जैसे दिन-खंड हर शहर में भिन्न दिखते हैं — और यही सही भी है, क्योंकि दिन की लंबाई स्थान-विशेष है। यह उपकरण निःशुल्क और बिना लॉगिन है; इसी सूट के आज का पंचांग जैसे अन्य उपकरण भी एक ही परीक्षित खगोलीय इंजन से चलते हैं।
आज का पंचांग — यह कैलकुलेटर क्या करता है
- तिथि, वार, नक्षत्र, योग, करण — पाँचों अंग समय-सीमा सहित
- सूर्योदय · सूर्यास्त · चंद्रोदय · चंद्रास्त
- राहु काल, यमगंड, गुलिक, अभिजीत
- चौघड़िया व होरा — चालू खंड और शेष समय
गणना कैसे काम करती है
चंद्र-सूर्य की दीर्घता का अंतर हर 12° पर नई तिथि बनाता है; दिन का आरंभ आपके नगर के सूर्योदय से लिया जाता है (द्रिग्गणित)। सूर्योदय-सूर्यास्त 0.833° मानक निम्नन पर खगोलीय सूत्रों से, और राहु काल व चौघड़िया दिन-रात्रि की वास्तविक लंबाई के भागों से निकलते हैं।
आगामी
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परिणाम कैसे समझें
पाँचों अंग अलग-अलग नहीं, साथ पढ़ें: तिथि से कार्य-चयन, नक्षत्र से स्वभाव व नामाक्षर, योग-करण से सूक्ष्म शुभ-अशुभ। व्रत है तो तिथि और पारण-समय पर नज़र रखें; यात्रा/कार्यारंभ है तो राहु काल टालकर चौघड़िया-होरा देखें।
ये मान कैसे निकलते हैं
ग्रह-स्थितियाँ मानक खगोलीय श्रेणियों से, लहरी अयनांश के साथ — विवरण गणना पद्धति में।
पंचांग क्या होता है?
पंचांग के पाँच अंग माने जाते हैं — तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण। इन्हीं पाँचों को मिलाकर दिन-भर के शुभ-अशुभ समय का ज्ञान होता है। वैदिक परंपरा में कोई भी शुभ कार्य — विवाह, गृह प्रवेश, व्रत या यात्रा — पंचांग देखकर ही निश्चित किया जाता है।
यहाँ दिया गया पंचांग सूर्य और चंद्र की वास्तविक खगोलीय गणना पर आधारित है। सूर्योदय-सूर्यास्त, मास, पक्ष, तिथि, नक्षत्र, योग, करण और राहु काल — सब आपके चुने हुए शहर के अनुसार दिखाए जाते हैं — शास्त्रीय नियमों पर, परीक्षण में सार्वजनिक संदर्भ-स्रोतों से मिलाकर (विधि: गणना पद्धति)।
आज का पंचांग कैसे पढ़ें?
ऊपर की पंचांग-शीट पाँच पंक्तियों में पूरे दिन का सार देती है। पहले वार देखें — हिंदू दिन सूर्योदय से शुरू होता है। फिर तिथि: यह बताती है कि आज चंद्र-कला की गिनती में कौन-सा दिन है और वह किस समय समाप्त होकर अगली तिथि ले रही है — व्रत-त्योहार इसी समय पर टिके होते हैं। नक्षत्र चंद्रमा का आकाशीय ठिकाना बताता है — नामकरण से लेकर मुहूर्त तक इसी पर चलते हैं। योग सूर्य-चंद्र की गणितीय जुगलबंदी है, शुभ-अशुभ कार्यों की गुणवत्ता इसी से तौली जाती है। और करण आधी तिथि — दैनिक छोटे-मोटे निर्णयों के लिए।
एक व्यावहारिक बात: तिथि-नक्षत्र का समापन-समय हमेशा आपके शहर के सूर्योदय से तुलना करके देखें। तिथि रात 11 बजे समाप्त हो रही हो तो पूरा दिन वही तिथि गिनी जाती है; पर वह सुबह 6 बजे ही ख़त्म हो रही हो, तो दिन का बड़ा हिस्सा अगली तिथि का हो जाएगा — यही फ़र्क़ शहर बदलने पर आता है।
पंचांग के पाँच अंग क्यों कहलाते हैं?
"पंचांग" = पंच (पाँच) + अंग। तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — ये पाँचों मिलकर किसी क्षण का पूरा "वैदिक पता" बनाते हैं, जैसे डाक-पते में घर, गली, शहर और पिन-कोड होते हैं। प्राचीन ज्योतिषियों ने इन्हीं पाँच सूत्रों को पढ़कर बताया कि कौन-सा क्षण किस कार्य के अनुकूल है। आधुनिक गणना इन्हीं सूत्रों को खगोलीय स्थितियों से जोड़ती है — चंद्रमा सूर्य से कितना आगे निकला (तिथि), चंद्रमा किस नक्षत्र-खंड में है, और सूर्य-चंद्र मिलकर 360° के किस अंश पर हैं (योग)। यही कारण है कि पंचांग हर शहर में कुछ मिनटों से भिन्न होता है — क्योंकि सूर्योदय ही भिन्न होता है।
सामान्य प्रश्न
- पंचांग के पाँच अंग कौन-से हैं?
- तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण — इन पाँच अंगों के आधार पर किसी भी कार्य का शुभ समय निकाला जाता है। इसीलिए इसे पंचांग (पंच + अंग) कहा जाता है।
- पंचांग की गणना किस आधार पर होती है?
- सूर्य और चंद्रमा की खगोलीय स्थिति (राशि-अंश) पर। तिथि चंद्रमा की सूर्य से दूरी के 12 डिग्री अंतराल से, नक्षत्र चंद्रमा की 27 नक्षत्र-मंडलों में स्थिति से निकलती है। यह गणना पूरी तरह वैज्ञानिक है।
- अखबार वाले पंचांग से कोई अंतर क्यों दिखता है?
- कुछ पंचांग दिन की शुरुआत सूर्योदय से और कुछ आधी रात से गिनते हैं; साथ ही द्रिग्गणित और परंपरागत सूत्रों में हल्का अंतर होता है। गहरे अंतर के बजाय ये मात्र कुछ मिनटों या एक तिथि-क्षण तक के अंतर होते हैं।